भाजपा में पुराने नेताओं की विदाई का नया तरीका
भारतीय जनता पार्टी में पुराने नेताओं को हटाने की प्रक्रिया में तेजी आई है। पार्टी ने अब नेताओं की नाराजगी की परवाह किए बिना उन्हें किनारे करने का नया तरीका अपनाया है। नरोत्तम मिश्रा के मामले में देखा गया है कि कैसे पार्टी ने टिकट वितरण में विवाद को जन्म दिया। क्या यह नई रणनीति भाजपा के लिए फायदेमंद साबित होगी? जानें इस लेख में भाजपा के नेताओं की विदाई के पीछे की कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
भाजपा में नेताओं की नई रणनीति
भारतीय जनता पार्टी में पुराने नेताओं को हटाने का सिलसिला पिछले कुछ वर्षों से जारी है। अब पार्टी ने यह प्रक्रिया और तेज कर दी है, जिसमें नेताओं की नाराजगी की परवाह नहीं की जा रही है। पहले, नेताओं को मुख्यधारा से हटा कर कहीं और समायोजित किया जाता था, लेकिन अब उन्हें सीधे किनारे किया जा रहा है। कई नेता, जो पहले पार्टी के महत्वपूर्ण चेहरे थे, अब नजर नहीं आते। उदाहरण के लिए, अनिल जैन, जो पहले राष्ट्रीय महामंत्री और राज्यसभा सांसद थे, अब किसी को नहीं पता कि वे कहां हैं।
भाजपा के नए नेतृत्व ने पुराने नेताओं को किनारे करने से पहले उन्हें कुछ समय के लिए जगह दी। मध्य प्रदेश के हालिया चुनाव में, कैलाश विजयवर्गीय को उनके बेटे की सीट पर चुनाव लड़ाया गया, और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को भी विधानसभा चुनाव में उतारा गया। जीतने पर, वे विधानसभा के स्पीकर बने।
छत्तीसगढ़ में रमन सिंह को भी स्पीकर बना दिया गया है। बिहार में प्रेम कुमार और नंद किशोर यादव को राज्यपाल बनाया गया। दिल्ली में विजेंद्र गुप्ता को स्पीकर बनाया गया, जबकि जगदीश मुखी को पहले राज्यपाल बनाया गया था। हरियाणा में रामविलास शर्मा और कैप्टन अभिमन्यु जैसे नेता मुख्यधारा से गायब हो चुके हैं। हिमाचल प्रदेश में प्रेम कुमार धूमल और उत्तराखंड में त्रिवेंद्र सिंह रावत जैसे नेता भी अब प्रासंगिक नहीं रहे। हालांकि, वसुंधरा राजे और शिवराज सिंह चौहान जैसे कुछ नेता अभी भी सक्रिय हैं।
भाजपा ने हटाने की प्रक्रिया में एक नया तरीका अपनाया है, जैसा कि नरोत्तम मिश्रा के मामले में देखा गया। मध्य प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री को उनकी पारंपरिक दतिया सीट से उपचुनाव में टिकट नहीं मिला, जिसके विरोध में उनके समर्थकों ने हंगामा किया। यह भाजपा में टिकट को लेकर का सबसे बड़ा विरोध था। जिला अध्यक्ष सहित पूरी कमेटी ने इस्तीफा दिया और समर्थकों ने हाईवे जाम कर दिया। हालांकि, नरोत्तम मिश्रा ने पार्टी की पसंद को स्वीकार किया।
अगर उपचुनाव में कांग्रेस जीत जाती है, तो मिश्रा की स्थिति मजबूत होगी, जिससे अन्य नेताओं का हौसला बढ़ेगा। भाजपा को इस सीट को हर हाल में जीतना होगा, क्योंकि हार से पार्टी की राजनीति पर बड़ा असर पड़ेगा। यदि भाजपा जीतती है, तो पुराने नेताओं की छंटाई का काम और भी तेज हो जाएगा
सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -
👉 सच की तोप व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें



सरकारी आवासों को खतरा पहुंचाने के आरोप में पूर्व मंत्री की पत्नी पर मुकदमा