IAS की कुर्सी पर अब बैठेंगे डॉक्टर साहब, हाईकोर्ट के एक हंटर ने बदल दिया यहाँ का पूरा सिस्टम
इलाहाबाद हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद उत्तर प्रदेश चिकित्सा शिक्षा विभाग ने DGME पद पर आईएएस की जगह डॉक्टर की तैनाती की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
Post Published By: Priyam Kashyap
Updated : 4 September 2026, 3:18 PM IST
Lucknow: उत्तर प्रदेश में ‘डायरेक्टर जनरल ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग’ (DGME) के पद पर IAS अधिकारियों के बजाय सरकारी मेडिकल कॉलेजों के सीनियर डॉक्टरों को नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। हाई कोर्ट के कड़े रुख के बाद मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों के प्रिंसिपलों की एक अंतरिम सीनियरिटी लिस्ट जारी की है और सात दिनों के भीतर आपत्तियां मांगी हैं।
IAS अधिकारियों की नियुक्ति पर विवाद
नियमों के अनुसार, DGME का पद किसी सरकारी मेडिकल कॉलेज के ऐसे प्रिंसिपल से भरा जाना चाहिए जिसे कमीशन ने चुना हो और जो सबसे सीनियर हो। हालांकि, 2023 में नियमों में बदलाव करके एक प्रावधान जोड़ा गया, जिसके तहत अगर कोई उपयुक्त प्रिंसिपल उपलब्ध न हो, तो सेक्रेटरी रैंक के IAS अधिकारी को नियुक्त किया जा सकता है।
इसके बावजूद, इस पद पर IAS अधिकारियों की नियुक्ति होती रही। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपलों ने इस मुद्दे को लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और मांग की कि DGME की नियुक्ति प्रमोशन के आधार पर की जाए।
अवमानना याचिका के बाद विभाग हरकत में आया
प्रिंसिपलों की याचिका पर कार्रवाई करते हुए हाई कोर्ट ने निर्देश दिया था कि प्रिंसिपलों का पक्ष सुने बिना किसी भी IAS अधिकारी को DGME नियुक्त न किया जाए। इसके बावजूद IAS अधिकारी नेहा शर्मा को इस पद पर नियुक्त कर दिया गया, जिसके बाद प्रिंसिपलों ने अवमानना याचिका दायर की।
मामले को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने कहा कि अगर प्रिंसिपलों को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया, तो संबंधित अधिकारियों जिनमें चीफ सेक्रेटरी भी शामिल हैं को व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ सकता है। इसके बाद विभाग ने प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।
लिस्ट में सात सीनियर प्रिंसिपल शामिल
मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट द्वारा जारी अंतरिम सीनियरिटी लिस्ट में राज्य भर के सात रेगुलर प्रिंसिपल शामिल हैं। इनमें ये शामिल हैं –
- डॉ. मुकेश यादव – सरकारी मेडिकल कॉलेज, अंबेडकर नगर
- डॉ. रमेश चंद्र गुप्ता – सरकारी मेडिकल कॉलेज, मेरठ
- डॉ. अरविंद त्रिवेदी – सरकारी मेडिकल कॉलेज, जालौन
- डॉ. संजय काला – सरकारी मेडिकल कॉलेज, कानपुर
- डॉ. सुधीर राठी – सरकारी मेडिकल कॉलेज, सहारनपुर
- डॉ. शिव कुमार – सरकारी मेडिकल कॉलेज, बदायूं
- डॉ. धर्मेंद्र कुमार – सरकारी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर
सात दिनों के भीतर आपत्तियां मांगी गईं
विभाग ने कहा है कि अगर किसी प्रिंसिपल को सीनियरिटी लिस्ट के बारे में कोई आपत्ति है, तो वे आदेश जारी होने के सात दिनों के भीतर सरकार के सामने अपना पक्ष रख सकते हैं। इसके बाद उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर अंतिम वरिष्ठता सूची जारी की जाएगी।
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