#Deathलचर स्वास्थ्य व्यवस्था: प्रसव पीड़ा के दौरान महिला ने तोड़ा दम, परिजनों ने लगाए लापरवाही के आरोप

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प्रदेश के स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की लचर व्यवस्था के मामले सामने आते रहते हैं। ताजा मामला टिहरी के प्रतापनगर विकासखंड का है। जहां प्रसव पीड़ा के दौरान महिला ने दम तोड़ दिया।

प्रसव पीड़ा के दौरान महिला ने तोड़ा दम
मामला रविवार का है। 27 वर्षीय महिला निवासी ओनाल गांव प्रसव के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चौण्ड लम्बगांव पहुंची थी। लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उचित व्यवस्था और लेडीज स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स व गायनी डॉक्टर के न होने के कारण गर्भवती महिला ने प्रसव पीड़ा के दौरान ही दम तोड़ दिया। महिला के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधक पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।

CHC सेंटर हुए रेफर सेंटर में तब्दील
यह व्यवस्था CHC चौण्ड की ही नहीं बल्कि पूरे जनपद में जितने भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है उन सबकी है। टिहरी के जिला मुख्यालय के जिला चिकित्सालय में भी लेडी स्पेसलिस्ट डॉक्टर गाइनी के ना होने के कारण तमाम CHC सेंटर केवल और केवल रेफर सेंटर बने हुए हैं। किसी भी प्रदेश की तरक्की का ग्राफ इस बात पर निर्भर करता है कि उसके लोग कितने सेहतमंद है।

प्रदेश में स्वास्थ्य सेवा की स्थिति निराशाजनक
जनता स्वस्थ रहे इसके लिए चिकित्सा सुविधाएं दुरुस्त होनी चाहिए। लेकिन उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवा की स्थिति निराशाजनक है। हालात यह है कि उत्तराखंड के सबसे बड़े हॉस्पिटल एम्स में जब उत्तराखंड के दूरस्थ गांव से कोई मरीज आपातकाल में पहुंचता है तो उसे वहां बेड तक नहीं मिल पाता।

प्राइवेट अस्पताल के लेनी पड़ रही शरण
जिस वजह से तमाम उत्तराखंड के दूरस्थ क्षेत्र से आए लोगों को आपातकाल की स्थिति में प्राइवेट अस्पताल की शरण लेनी पड़ती है। इससे साफ साबित होता है कि हमारी सरकार और स्वास्थ्य विभाग उत्तराखंड के आम जनमानस के लिए कितनी संवेदनशील और कितनी चिंतित है।