आरक्षण की आग में फिर झुलसा देश: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर राजनीतिक बवाल, सड़कों पर उतरने की चेतावनी!
देश में एक बार फिर आरक्षण के मुद्दे पर सियासत सुलग उठी है। पिछले 24 घंटों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के भीतर उप-वर्गीकरण (Sub-categorization) को लेकर दिए गए एक पुराने संदर्भ पर आई ताजा याचिकाओं और उस पर राजनीतिक दलों की तीखी प्रतिक्रियाओं ने माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार पर्दे के पीछे से आरक्षण को कमजोर करने की साजिश रच रही है। 15 और 16 जुलाई के बीच देश के कई हिस्सों, विशेषकर उत्तर प्रदेश और बिहार में विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इस फैसले के विरोध में उग्र प्रदर्शन किए हैं और आने वाले दिनों में देशव्यापी चक्का जाम करने की खुली चेतावनी दे डाली है।
नेताओं के बीच जुबानी जंग इस कदर बढ़ गई है कि संसद के आगामी सत्र से पहले ही सड़क पर संग्राम शुरू हो चुका है। विपक्ष का साफ कहना है कि बाबासाहेब आंबेडकर के संविधान से किसी भी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वहीं, सत्ता पक्ष ने पलटवार करते हुए कहा है कि विपक्ष केवल वोट बैंक की घिनौनी राजनीति कर रहा है और दलितों को गुमराह करने की कोशिश में जुटा है। धरातल पर स्थिति यह है कि छात्र और युवा संगठन लामबंद हो रहे हैं, जिससे कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर पुलिस महकमे के हाथ-पांव फूल गए हैं। अगर सरकार ने तुरंत इस पर कोई ठोस सफाई या कदम नहीं उठाया, तो यह आंदोलन हिंसक रूप अख्तियार कर सकता है।
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