अग्निवीरों के लिए बंपर खुशखबरी: 4 साल बाद जेब में आएंगे लाखों

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देश की सेवा का जज्बा रखने वाले युवाओं के लिए बेहद खास खबर है। साल 2022 में शुरू की गई ‘अग्निवीर योजना’ का पहला बैच अक्टूबर 2026 में अपना 4 साल का सफर पूरा करने जा रहा है। जैसे-जैसे विदाई का वक्त करीब आ रहा है, युवाओं के बीच यह चर्चा तेज है कि आखिर उन्हें सेवा समाप्ति पर क्या मिलेगा। घबराइए नहीं, सरकार ने अग्निवीरों के सुनहरे भविष्य के लिए एक शानदार वित्तीय और करियर पैकेज तैयार किया है, जिसे जानकर आप भी खुश हो जाएंगे।

क्या है अग्निवीरों की कमाई का पूरा गणित? अग्निवीरों की सैलरी हर साल बढ़ती है। खास बात यह है कि उनके वेतन का 30 प्रतिशत हिस्सा ‘अग्निवीर कॉर्पस फंड’ में जमा होता है और सरकार भी उतनी ही राशि अपनी तरफ से मिलाती है। पहले साल 30,000 रुपये का मासिक वेतन मिलता है, जिसमें से हाथ में 21,000 रुपये आते हैं। दूसरे साल यह बढ़कर 33,000 रुपये (23,100 इन-हैंड), तीसरे साल 36,500 रुपये (25,550 इन-हैंड) और चौथे साल में 40,000 रुपये (28,000 इन-हैंड) हो जाता है।

सेवा निधि पैकेज: टैक्स-फ्री लाखों का तोहफा जब अग्निवीर 4 साल की सेवा पूरी कर बाहर निकलेंगे, तो उन्हें 10.04 लाख रुपये से लेकर 11.71 लाख रुपये तक का एकमुश्त ‘सेवा निधि पैकेज’ मिलेगा। राहत की सबसे बड़ी बात यह है कि यह पूरी राशि पूरी तरह टैक्स-फ्री होगी। इसके साथ ही, उन्हें एक ऐसा ‘स्किल सर्टिफिकेट’ मिलेगा जो 12वीं के समकक्ष माना जाएगा, जिससे उन्हें कॉर्पोरेट जगत में नौकरी पाने में बड़ी मदद मिलेगी।

सुरक्षा कवच और सरकारी नौकरियों में मौका पैसों के अलावा, सरकार ने अग्निवीरों को 48 लाख रुपये का हेल्थ इंश्योरेंस कवर भी दिया है। सेना से बाहर आने के बाद भी उनकी राह आसान है—केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) और असम राइफल्स में उन्हें 10 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। साथ ही, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे कई राज्यों ने अपनी पुलिस भर्ती में अग्निवीरों को प्राथमिकता देने का ऐलान किया है। सरकारी नौकरियों में उन्हें आयु सीमा में भी विशेष छूट का लाभ मिलेगा।

क्या बढ़ेगा परमानेंट होने का कोटा? अब सबसे बड़ी खुशखबरी! मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सरकार पहले बैच के अधिक से अधिक अग्निवीरों को सेना में ही परमानेंट करने पर विचार कर रही है। अभी 25 प्रतिशत का प्रावधान है, लेकिन सेनाओं ने इसे बढ़ाने की सिफारिश की है। नौसेना ने 75 फीसदी, जबकि थलसेना और वायुसेना ने 50 फीसदी जवानों को स्थायी करने की वकालत की है। जल्द ही इस पर कोई बड़ा आधिकारिक फैसला सामने आ सकता है।

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