कैश में लेनदेन करते हैं तो हो जाएं सावधान! लगेगा भारी जुर्माना, तुरंत जानें ये 8 नियम

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आज के डिजिटल जमाने में भले ही ऑनलाइन पेमेंट का चलन बढ़ गया हो, लेकिन कैश का इस्तेमाल आज भी हमारे जीवन का हिस्सा है। घर के छोटे खर्च हों या प्रॉपर्टी की बड़ी डील, हम अक्सर कैश को ही प्राथमिकता देते हैं। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि आयकर अधिनियम 2025 के तहत नकदी के इस्तेमाल को लेकर बेहद सख्त नियम हैं? अगर आप अनजाने में भी इन सीमाओं को पार करते हैं, तो आयकर विभाग आपकी जेब ढीली कर सकता है। टैक्स जानकारों के अनुसार, टैक्स चोरी रोकने और पारदर्शिता लाने के लिए बनाए गए ये 8 नियम हर नागरिक को पता होने चाहिए।

कैश ट्रांजैक्शन से जुड़े ये हैं 8 अहम नियम

1. नकद प्राप्ति की सीमा: नियम साफ है, आप किसी एक व्यक्ति से एक दिन में या किसी एक आयोजन के लिए 2 लाख रुपये या उससे अधिक की रकम नकद में प्राप्त नहीं कर सकते। यदि आप पकड़े गए, तो ली गई पूरी रकम के बराबर जुर्माना लगाया जा सकता है।

2. लोन या डिपॉजिट लेने पर रोक: अगर आप किसी से कर्ज ले रहे हैं या कोई डिपॉजिट स्वीकार कर रहे हैं, तो 20,000 रुपये से ज्यादा की राशि नकद में न लें। हमेशा बैंक ट्रांसफर या चेक का ही इस्तेमाल करें।

3. कर्ज चुकाने का नियम: जिस तरह कर्ज लेने पर सीमा है, उसी तरह उसे चुकाने पर भी है। 20,000 रुपये या उससे अधिक के कर्ज की किश्त या पूरी अदायगी नकद में करना गैर-कानूनी है।

4. बिजनेस खर्च का भुगतान: अगर आप एक कारोबारी हैं, तो एक दिन में एक व्यक्ति को 10,000 रुपये से अधिक का नकद भुगतान करके टैक्स छूट (डिडक्शन) क्लेम नहीं कर सकते। हालांकि, ट्रांसपोर्टर्स के लिए यह सीमा 35,000 रुपये है।

5. चंदा या दान देने पर पाबंदी: दान देकर टैक्स बचाने (सेक्शन 80G) की सोच रहे हैं? याद रखें, 2,000 रुपये से अधिक का दान नकद में देने पर आपको कोई टैक्स छूट नहीं मिलेगी। इसके लिए ऑनलाइन पेमेंट या चेक का ही उपयोग करें।

6. बैंक से बड़ा कैश निकालना: बैंक से नकदी निकालने की कोई मनाही नहीं है, लेकिन अगर विड्रॉल एक निश्चित सीमा से ज्यादा होता है, तो सेक्शन 194N के तहत बैंक उस पर टीडीएस (TDS) काट सकता है।

7. प्रॉपर्टी लेनदेन में सावधानी: घर या जमीन खरीदते-बेचते समय कैश का बड़ा लेनदेन करना भारी पड़ सकता है। सेक्शन 269SS के तहत प्रॉपर्टी सौदों में 20,000 रुपये से ऊपर का कोई भी एडवांस या भुगतान नकद में करना पेनल्टी को न्योता देना है।

8. टुकड़े-टुकड़े में पेमेंट की चालाकी: पेनल्टी से बचने के लिए कई लोग बड़े भुगतान को छोटे हिस्सों में बांट देते हैं। आयकर विभाग इसे ‘स्प्लिट ट्रांजैक्शन’ मानता है। अगर ये भुगतान एक ही सौदे से जुड़े हैं, तो विभाग इन्हें एक ही ट्रांजैक्शन मानकर पूरा जुर्माना वसूलता है।