रिटायरमेंट से पहले ही तय हो गया ढाई लाख का पैकेज, शहरी विकास विभाग में अवैध नियुक्ति पर बवाल

उत्तराखंड के शहरी विकास विभाग में इन दिनों जबरदस्त हंगामा मचा हुआ है। सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और पारदर्शिता के दावों के बीच विभाग में एक ऐसी नियुक्ति का मामला सामने आया है, जिसने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) पर हुई एक हाई-प्रोफाइल नियुक्ति से जुड़ा है, जिसको लेकर अब उत्तराखंड बेरोजगार संघ आर-पार के मूड में आ गया है। संगठन ने शहरी विकास मंत्री राम सिंह कैड़ा, सचिव IAS नितेश झा, संयुक्त सचिव महावीर सिंह चौहान और निदेशक विनोद गोस्वामी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सीधे-सीधे अल्टीमेटम दे दिया है कि वह कार्रवाई करे वरना निदेशालय में ताला जड़कर उग्र आंदोलन किया जाएगा।
नक्शेदेखें
क्या है पूरा मामला?
पूरा विवाद ‘रवि पांडे’ नाम के एक अधिकारी की संविदा नियुक्ति को लेकर है। आरोप है कि अफसरों ने नियमों को ताक पर रखकर रवि पांडे को फायदा पहुँचाने के लिए पूरी प्रक्रिया ही बदल डाली। बताया जा रहा है कि इस नियुक्ति को लेकर पहले ही लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन जिम्मेदार अफसरों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। बाद में जब सूचना का अधिकार (RTI) के तहत दस्तावेज निकाले गए, तो कई हैरान कर देने वाली परतें उधड़कर सामने आईं।
RTI से खुले धांधली के पन्ने, 5 बड़े खुलासे
आरटीआई से मिले दस्तावेजों से इस पूरी चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शर्तें ही ऐसी बनाईं गईं कि केवल एक की एंट्री हो सके। आरोप है कि पद के लिए योग्यता और शर्तें इस तरह तैयार की गईं, जिससे केवल रवि पांडे ही इसके दायरे में आ सकें।

एक ही फॉर्म आया और वही चुन लिया गया
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस पद के लिए सिर्फ और सिर्फ रवि पांडे का ही एकमात्र आवेदन आया। कायदे से जब सिर्फ एक आवेदन मिला था, तो मुकाबले और निष्पक्षता के लिए दोबारा आवेदन मंगाए जाने चाहिए थे। लेकिन अफसरों ने ऐसा न करके सीधे रवि पांडे के नाम पर मुहर लगा दी।
रिटायरमेंट 30 अप्रैल को, सहमति 24 अप्रैल को ही!
कागजों का खेल देखिए। 29 मार्च 2026को विज्ञापन जारी हुआ।15 अप्रैल 2026को फॉर्म भरने की आखिरी तारीख थी। 17 अप्रैल 2026को अफसरों ने नियुक्ति की सिफारिश कर दी। 24 अप्रैल 2026को रवि पांडे ने पद संभालने की अपनी सहमति दे दी और 30 अप्रैल 2026को रवि पांडे अपने नियमित सरकारी पद (अधीक्षण अभियंता) से रिटायर हुए।यानी सरकारी सेवा में रहते हुए और रिटायरमेंट से हफ्ते भर पहले ही संविदा पद के लिए सहमति बन गई।

ढाई लाख सैलरी और हर साल 25 हजार का इंक्रीमेंट!
सहमति पत्र में 2.50 लाख रुपये प्रति महीने का मानदेय और हर साल 25,000 रुपये की वेतनवृद्धि (इंक्रीमेंट) की भारी-भरकम शर्त शामिल है। बेरोजगारों का सवाल है कि किस नियम के तहत किसी एक व्यक्ति को यह खास सहूलियत दी गई?
पुराना रिकॉर्ड भी सवालों के घेरे में
रवि पांडे जब विभाग में अधीक्षण अभियंता (SE) थे, तब राज्य में कचरा प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) की 21 परियोजनाएं बंद हो गई थीं। यही नहीं, लापरवाही के कारण 22 करोड़ रुपये का बजट केंद्र सरकार को वापस लौटाना पड़ा था। इसके बावजूद ऐसे अधिकारी पर दोबारा मेहरबानी क्यों दिखाई गई?
बेरोजगार संघ ने विभाग से पूछे 7 तीखे सवाल
इस पूरे मामले में बेरोजगार संघ ने शहरी विकास मंत्री और आला अधिकारियों से सीधे सवाल पूछे हैं-
नीतियांदेखें
- क्या पद की शर्तें सिर्फ रवि पांडे को ध्यान में रखकर गढ़ी गईं?
- एक ही आवेदन आने पर भी दोबारा प्रक्रिया शुरू क्यों नहीं की गई?
- रिटायरमेंट से पहले ढाई लाख रुपये और सालाना 25 हजार इंक्रीमेंट की शर्त किसने पास की?
- नियुक्ति से पहले पुराने कामकाज और परफॉर्मेंस की जांच क्यों नहीं हुई?
- कचरा प्रबंधन की 21 परियोजनाएं ठप होने और 22 करोड़ रुपये वापस जाने का जिम्मेदार कौन है?
- इतनी लिखित शिकायतों के बाद भी इस अवैध नियुक्ति को रद्द क्यों नहीं किया जा रहा?
- क्या इस पूरे खेल की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी?
उग्र आंदोलन और तालाबंदी की चेतावनी
उत्तराखंड बेरोजगार संघ ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और शहरी विकास मंत्री राम सिंह कैड़ा से मांग की है कि इस नियुक्ति से जुड़े सभी दस्तावेज ,मसलन विज्ञापन, आवेदन, चयन प्रक्रिया, सहमति पत्र और इंक्रीमेंट की शर्तें, सार्वजनिक की जाएं। संगठन ने साफ कहा है कि अगर रवि पांडे की अवैध नियुक्ति को तुरंत रद्द नहीं किया जाता और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती, तो बेरोजगार संघ शहरी विकास निदेशालय में तालाबंदी कर सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा।
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