उत्तराखंड की राजनीति से जुड़ी खबर:- रामशरण नौटियाल की घर वापसी। थामा हाथ, जौनसार से यमुनोत्री तक बदली सियासी हवा

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Ramsharan Nautiyal officially joins Congress

उत्तराखंड की  राजनीति में सोमवार को एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला। जाने-माने पार्श्व गायक जुबिन नौटियाल के पिता और देहरादून के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामशरण नौटियाल ने आधिकारिक तौर पर ‘हाथ’ का दामन थाम लिया है। नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के मुख्यालय में आयोजित एक सादे और गरिमापूर्ण कार्यक्रम में उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर कांग्रेस की उत्तराखंड प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और एआईसीसी सचिव गुरदीप सप्पल समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। सभी नेताओं ने कांग्रेस का पटका पहनाकर नौटियाल का पार्टी में स्वागत किया और कहा कि उनके आने से उत्तराखंड के पर्वतीय और मैदानी दोनों क्षेत्रों में संगठन को एक नया बल मिलेगा।

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बीजेपी से क्यों मोहभंग ? कब जुड़े थे और क्यों छोड़ी पार्टी

रामशरण नौटियाल का यह कदम वास्तव में उनकी  राजनीतिक ‘घर वापसी’ माना जा रहा है। वह सालों तक कांग्रेस में सक्रिय रहे थे और राज्य उपाध्यक्ष जैसी अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके थे। नौटियाल वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर के दौरान अपने समर्थकों के साथ भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए थे। बीजेपी ने उन्हें 2022 के विधानसभा चुनाव में चकराता सीट से अपना उम्मीदवार भी बनाया था।

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बीजेपी में लगभग एक दशक बिताने के बाद हाल ही में सितंबर 2026 में उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। नौटियाल का आरोप था कि स्थानीय स्तर पर बीजेपी कार्यकर्ता और वरिष्ठ नेता उनकी अनदेखी कर रहे थे। इसके अलावा उन्होंने क्षेत्रीय विकास योजनाओं में कथित अनियमितताओं, गुटबाजी और संगठन के भीतर आंतरिक अनुशासनहीनता का हवाला देते हुए बीजेपी से अपनी राहें अलग कर ली थीं।

जौनसार बावर से यमुनोत्री तक सियासत पर क्या पड़ेगा असर?

रामशरण नौटियाल केवल जुबिन नौटियाल के पिता होने के नाते ही चर्चा में नहीं रहते, बल्कि जौनसार-बावर जनजाति क्षेत्र में उनकी जमीनी पकड़ बेहद मजबूत मानी जाती है। उनके कांग्रेस में आने से उत्तराखंड के सीमावर्ती और मैदानी विधानसभा क्षेत्रों में सियासी समीकरण पूरी तरह से गरमा गए हैं। चकराता विधानसभा सीट परंपरागत रूप से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह का गढ़ रही है। 2022 में नौटियाल ने बीजेपी के टिकट पर प्रीतम सिंह को कड़ी टक्कर दी थी। अब जब नौटियाल खुद कांग्रेस में आ गए हैं, तो जौनसार बावर में बीजेपी के पास विकासनगर विधायक मुन्ना सिंह चौहान की पत्नी मधु चौहान के अलावा कोई बड़ा स्थानीय चेहरा नहीं बचा है। विकासनगर और सहसपुर सीटों पर जौनसार-बावर से आए मतदाताओं की अच्छी-खासी तादाद है। नौटियाल का जिला पंचायत अध्यक्ष का पुराना कार्यकाल और उनका व्यक्तिगत प्रभाव इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस के पक्ष में वोट बैंक को लामबंद करने का काम करेगा। यमुनोत्री विधानसभा क्षेत्र जौनसार बावर की सीमाओं से सटा हुआ है। वहां के स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों के चलते नौटियाल का असर यमुनोत्री के दूर-दराज इलाकों तक है। उनके कांग्रेस में शामिल होने से इस सीट पर भी बीजेपी के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगना तय माना जा रहा है।

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बीजेपी के लिए पश्चिमी गढ़वाल में एक बड़ा झटका

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तराखंड के आगामी चुनावों से ठीक पहले रामशरण नौटियाल का कांग्रेस में जाना बीजेपी के लिए पश्चिमी गढ़वाल में एक बड़ा झटका है, वहीं कांग्रेस के लिए यह पहाड़ी और जनजातीय इलाकों में अपनी स्थिति को और मजबूत करने का सुनहरा मौका बनकर आया है। मगर कांग्रेस के लिए हालात तब विकट होंगे जब सहसपुर या विकासनगर या चकराता से टिकट का दावा करेंगे। हालांकि संभव है कि वह खुद के लिए टिकट न मांगें और 2029 के लोकसभा चुनाव में अपने मशहूर बेटे जुबिन नौटियाल के लिए टिहरी लोकसभा का टिकट चाहें। बहरहाल अभी यह सब भविष्य के गर्भ में है।

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