बांग्लादेश से हर महीने 200 रोहिंग्या ​​​​​आ रहे,₹10 लाख में बॉर्डर पार कराने का इंतजाम-त्रिपुरा पुलिस

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आरोपी जलील मियां त्रिपुरा का रहने वाला है। उस पर NIA ने एक लाख रुपए का इनाम घोषित कर रखा था।
भारत सरकार एक ओर जहां देश में अवैध रूप से बसे 40 हजार से अधिक रोहिंग्या घुसपैठिए मुसलमानों को वापस उनके देश में भेजने के प्रयास कर रही है। वहीं, बांग्लादेश की सीमा में घुसपैठ कर हर महीने 200 से अधिक रोहिंग्या भारत लाए जा रहे हैं।

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इसके बाद इन रोहिंग्या मुसलमानों को फर्जी पहचान देकर देश के 14 राज्यों असम, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, मिजोरम, मेघालय, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, पंजाब, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और केरल में बसाया भी जा रहा है। यह सब कार्य एक अंतरर्राष्ट्रीय मानव तस्करी गिरोह द्वारा किया जा रहा है।

हाल ही में NIA की टीम ने इस मानव तस्कर गिरोह के मास्टरमाइंड जलील मियां को गिरफ्तार किया है। उसने पूछताछ के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। NIA जलील से उसके गिरोह के अन्य संदिग्धों के बारे में पूछताछ कर रही है।

त्रिपुरा से गिरोह चला रहा आरोपी, 10 से 20 लाख में कराता था घुसपैठ
आरोपी जलील मियां त्रिपुरा का रहने वाला है। उस पर NIA ने एक लाख रुपए का इनाम घोषित कर रखा था। जलील मियां पकड़े गए गिरोह के मुखिया जिबोन रूद्र पाल उर्फ सुमन का पार्टनर है, जिसे NIA ने पहले गिरफ्तार किया था।

जलील मियां के सहयोगी जज मियां और शंतो अभी भी फरार हैं। NIA उनकी तलाश कर रही है। ये सभी मानव तस्करी के गिरोह को त्रिपुरा से ही ऑपरेट करते थे। जलील को पहले भी NIA ने 8 नवंबर 2023 तो उसके घर पर गिरफ्तार करने का प्रयास किया था, मगर वह फरार होने में कामयाब रहा था।

इसके बाद NIA ने उसके गिरोह के 29 लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। जांच में सामने आया है कि बांग्लादेश में मौजूद गिरोह के लोग भारत में बसने की चाह रखने वाले रोहिंग्या मुसलमानों को 10 से 20 लाख रुपए (14 से 28 लाख बांग्लादेशी टका) में उन्हें सीमा पार करा कर भारत पहुंचाने और यहां पर फर्जी पहचान के जरिये बसाने का पैकेज दे रहे हैं।

भारतीय लहजे में हिंदी बोलने की ट्रेनिंग, ताकि राज न खुले
NIA के सूत्र बताते हैं कि मानव तस्करी गिरोह की जांच के दौरान जांच एजेंसियों को एक चौंकाने वाला तथ्य भी पता चला है। सामने आया है कि रोहिंग्या घुसपैठियों को भारत में घुसपैठ कराने से पूर्व या बाद में उन्हें भारतीय एक्सेंट में हिंदी, असमी और अन्य भारतीय भाषाओं का ज्ञान और ट्रेनिंग भी दी जाती है। जिससे जब रोहिंग्या घुसपैठिए जब भारत पहुंचे तो उसके बोलने के लहजे से उसकी पहचान न हो सके। इसके अलावा, घुसपैठिए द्वारा जो भाषा सीखी जाती है, वह तय करती है कि उसे अवैध रूप से भारत के किस राज्य में बसाया जा सकता है।

भूमिगत सुरंगों से रोज 5 से 10 रोहिंग्याओं की भारत में घुसपैठ
यह गिरोह हर रोज बांग्लादेश से 5 से 10 लोगों को भारत में घुसपैठ कराता था। इसके लिए बांग्लादेश की सीमा के साथ लगते असम, मिजोरम, मेघालय और त्रिपुरा राज्यों में भूमिगत सुरंगें बना रखी है।

घुसपैठ के जरिए भारत में आने के बाद घुसपैठियों का हुलिया बदल दिया जाता है। जिससे कि कोई उन पर शक न कर सके। इसके बाद उन्हें किसी अज्ञात जगह पर कुछ दिनों के लिए रखा जाता है। इस दौरान घुसपैठियों की फोटो लेकर उनके फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें दिए जाते हैं।

दिल्ली में रोहिंग्या की कई बस्तियां

यूनाइटेड नेशंस हाई कमिश्नर फॉर रिफ्यूजीज यानी UNHRC के अनुसार, दिल्ली में 1000 रोहिंग्या शरणार्थी रजिस्टर्ड हैं। हालांकि, इनकी वास्तविक संख्या इससे ज्यादा होने का अनुमान है।
भारत में रोहिंग्या की बसावट के मामले में दिल्ली प्रमुख स्थानों में से एक है। दिल्ली में कम से कम पांच ऐसे अनौपचारिक शिविर मौजूद हैं, जहां रोहिंग्या की आबादी बड़ी संख्या में है।
यहां जसोला, यमुना नदी के किनारे, श्रम विहार, कंचन विहार और साउथ दिल्ली स्थित मदनपुर खादर समेत पांच ऐसे इलाके हैं, जहां रोहिंग्या मुस्लिमों की आबादी है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में रोहिंग्या मुस्लिम अपना धर्म तक बदलने लगे हैं।

भारत में कितने रोहिंग्या हैं?
भारत में 2012 के बाद से रोहिंग्या मुस्लिमों की संख्या तेजी से बढ़ी है। गृह मंत्रालय ने, UNHRC के हवाले से बताया कि भारत में दिसंबर 2021 तक 18 हजार रोहिंग्या मुस्लिमों के होने की जानकारी मौजूद है।

2017 में मोदी सरकार ने राज्य सभा में बताया था कि भारत में करीब 40 हजार रोहिंग्या आबादी अवैध रूप से रह रही है।
सरकार ने कहा था कि महज 2 साल के अंदर ही देश में रोहिंग्या की आबादी 4 गुना बढ़ गई ।
सरकार के मुताबिक, देश में रोहिंग्या विशेषकर जम्मू-कश्मीर, हैदराबाद, दिल्ली-NCR, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मणिपुर में हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया था कि देश में बांग्लादेशियों और रोहिंग्या के लिए कोई शरणार्थी कैंप नहीं है।
सरकार संबद्ध राज्य सरकारों के साथ मिलकर अवैध रोहिंग्या को उनके देश वापस भेजने की तैयारी कर रही है।
ह्यूमन राइट्स वॉच यानी HRW के मुताबिक, भारत में करीब 40 हजार रोहिंग्या देश के अलग-अलग हिस्सों में कैंपों और झुग्गियों में रहते हैं।
एक अनुमान के मुताबिक, करीब 5 हजार रोहिंग्या मुस्लिम जम्मू-कश्मीर के आसपास के इलाकों में रहते हैं। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनकी असली संख्या 10 हजार के करीब है।
क्या रोहिंग्या का है आतंक से कनेक्शन?

बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स यानी BSF के DG केके शर्मा ने 2018 में कहा था कि देश में अवैध रूप से रोहिंग्या का बड़ी संख्या में आना देश की सुरक्षा के लिए खतरा है।
उन्होंने कहा था कि रोहिंग्या के आतंकी संगठनों से लिंक की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रोहिंग्या छोटी-मोटी चोरियों से लेकर लूटपाट, हत्या और डकैती जैसे बड़े अपराधों में भी शामिल रहते हैं।
कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2020 में दिल्ली में शाहीनबाग और जफराबाद में हुए CAA प्रोटेस्ट में सैकड़ों की संख्या में रोहिंग्या ने हिस्सा लिया था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजनीतिक दलों ने वोट के फायदे के लिए कई रोहिंग्या के राशन और आधार कार्ड तक बनवा दिए हैं, जिससे अवैध रूप से रह रहे कई रोहिंग्या की पहचान भी मुश्किल हो गई है।
वैसे अब तक भारत में किसी आतंकी हमले में किसी रोहिंग्या रिफ्यूजी का हाथ होने को लेकर कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है।